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हमसफ़र......
दूर नज़र आ रही हैं मंजील के सफ़र अब तय होने को ह ैतू ऐसे ना देख मुझे हमराही के दील अब मेरा रोने को है बीछडे जो अब हम तो ना जाने फीर कब मीलेंगे ए मेरे हमराही मुमकींन यही है की अब ख्वावों मे मीलेंगे मत कहो कुछ होटों से के ये नजरें सब बता रहीं है दील मे छीपे हैं कीतने ही राज के सभी से परदे उठा रहीं हैं आप से बीछड्नै का कीतना है गम हमको की अब ये ऑंखें नम होती ही जा रहीं है जाते हो तो जाओ पर इतना तो बताते जाओ क्या अपको भी हमारी याद इतना ही सता रही है !
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