ठोकर खा-खा कर गीरते हैं , गीर-गीर कर फीर उठते हैं ,
उठ-उठ कर सभंलते है , फीर संभल- संभल कर चलते हैं,
चल -चल कर आगे बड़ते हैं , आगे बड़-बड़ कर सफ़र तय करते हैं ,
सफ़र तय कर-कर मंजील पाते हैं , मंजील पा-पा कर जीते हैं,
जी-जी कर मरते जाते हैं , मर-मर कर जीते जाते हैं ,
ग़मों को आँसुऑ मे घोलकर ....पीते जाते है,पीते जाते हैं ,पीते जाते हैं !