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वो सुबह फीर आएगी .....
वो सुबह फीर आएगी ...वो सुबह फीर आएगी सुबह जीसने हर लीये थे अपने सारे गम , सुबह जीसने कर दीं थी परेसानीयां सारी कम। तू क्यों घबराता है देखकर इस अन्धीयारे को, की वोह सुबह फीर आकर दीये जला जायेगी। वो सुबह फीर आएगी ...वो सुबह फीर आएगी।
सूरज की पहली कीरन के साथ देगी वो दस्तक, की खुसीयों की नदीयां लेकर आएगी वो घर तक। हे अगर वीश्वास तुझे उस सुबह पर, तो देख वो आकर तुझे जगा जायेगी। वो सुबह फीर आएगी ...वो सुबह फीर आएगी।
अगर कर सकता हे इन्तेजार तो कर, के उससे दूर नहीं अब तेरा नगर। तू नींद से उठकर देख सकता हे अगर , तो देख वो तेरे नगर खुसीयों के फूल खीला जायेगी। वो सुबह फीर आएगी ...वो सुबह फीर आएगी
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