वक़्त की आपा-धापी में कदम ये रुकते नहीं
आगे बड़ने की होड़ में जाने क्यों कभी थकते नहीं
इतनी बड़ी भीड़ में एक अजीब सी घुटन है
जाने अनजाने चेहरों मे ना जाने कीसे धूंढता ये मन है
जाने क्यों दुनीया यहाँ पैसों के पीछे दौड़ती है
शहर की हरेक गली में जींदगी दम तोड़ती है !