आँधी मे ,तूफ़ानों मे,जर्जर सरकारी मकानों मे,सफ़र की लंबी थकानो मे ,एक आसरा तलाशता "बेजान" आदमी,उफ्फ .........ये आम आदमी.राशन की लंबी कतारों मे,अस्पताल की चार दीवारों मे,महँगाई से भरे बाज़ारों मे,खुद की पहचान तलाशता "गुमनाम " आदमी,उफ्फ .........ये आम आदमी.आँखों मे कुछ टूटे सपने लीए,रूठते रीश्तोन मे कुछ अपने लीये,दील मे कुछ ना भूल पाने वाले सदमे लीये,तसल्ली के कुछ पल तलाशता "नाकाम" आदमी,उफ्फ .........ये आम आदमी.लाख हों गम फीर भी खुशी से पीता है,सच है जीन्दगी जी भर के जीता है,फीर चाहे हर दीन संघर्ष मे बीता है,दर्द को हम्दर्द बना लेता है "नादान" आदमी,उफ्फ .........ये आम आदमी.
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