Dec. 2-3, 1984-The Bhopal Gas Tragedy........One Of The Biggest Disasters in the World in Which More Than 20,000 People Were Killed and More Than 170,000 Were SEVERELYAFFECTED........It Has Been 23 Years Since Then But the Effect of thatDisaster is Still Continuing.......Here are Few Lines Dedicated to AllWho Were Affected by This Disaster............उम्र की चादर ओढे , यादों की लाठी िलये,ग़मों की सर्द हवाओं से बचने , बेठे हे उम्मीदों के िचराग तले !नयी सुबह के इंतज़ार मे ,वक़्त की बहती धुप- छांव मे,कुछ बुझे से कुछ थके से ,कुछ लाचारी के बोझ तले !चहरे से झलकती है तन्हाईदूर-दूर तक नहीं कोई परछाईकुछ डरे से,कुछ सहमे से,कुछ बेदर्द ग़मों के दर्द तले !खामोश िगगाहें तकती हैं राहें,टूटे िबखरे ख्वावों से कैसे यकीन िदलायें,कुछ बहके से,कुछ िसमते से,कुछ मायुशी के गर्त तले !